गुप्तकालीन भारतीय कृषि

गुप्तकालीन भारतीय कृषि के क्षेत्र में परिवर्तन हमारा देश भारत कृषि प्रधान है, यहाँ के निवासी गुप्तकाल में 90 प्रतिशत ग्रामों में रहते थाजनका प्रमुख व्यवसाय कृषि था । गुप्तकाल में कृषि के हर छोटे-बड़े क्षेत्र में नवीनता की छाप हम देखने को मिलती है। गुप्तकाल के शासक कृषि प्रिय सम्राट थे, वे हर प्रकार की उन्नति चाहते थ। क्योंकि उन्नत कृषि से ही उनके साम्राज्य की आर्थिक व्यवस्था ठीक रह सकती थी और कृषि की उन्नति से ही खुशहाली देश में पनप सकती थी इस बात का गुप्त सम्राटों ने सदैव अपने हृदय में पनपने दिया। साथ ही साथ भारतीय किसानों ने भी हृदय से कृषि की उन्नति के लिए कार्य किये।

गुप्तकाल में नवीन कृषि खोजों को अपनाकर कृषि के क्षेत्र में इतनी उन्नति हुई कि उनकी आर्थिक स्थिति पहले के मुकाबले में अच्छी बन गई। ग्रामों की दशा सुधर गई, ग्रामों में भी पक्के मकान दिखाई देने लगे तथा किसानों के पशुधन में तेजी से वृद्धि हुई। साथ ही साथ गुप्त साम्राज्य शक्तिशाली रूप में उभरने लगा। राजनैतिक एकीकरण तथा राष्ट्रीयता के प्रतिष्ठान द्वारा गुप्तकाल र की कृषि पहले के कालों के मुकाबले में बेहतर रूप में दिखाई देने लगी। गुप्त सम्राटों ने कृषि की रक्षा के लिए पिछले कालों के मुकाबले में बेहतर कार्य किये जिनमें से कुछ का वर्णन निम्नलिखित हैं।

  1. किसानों को पहले के मुकाबले में अधिक रूप में आर्थिक सहायता दी गई, उनको अच्छे बीज खरीदने तथा अच्छे नस्ल के बैल, भैंस खरीदने के लिए अधिक धनराशि दी, पशु खरीदकर उनके द्वारा कृषि की पैदावार में वृद्धि हुई।
  2. नये-नये कृषि यंत्रों के प्रयोग पर बल दिया गया तथा उनको किसानों से खरीदने के लिए कहा गया। जिन किसानों के पास कृषि औजार खरीदने के लिए धन नहीं था, सरकार ने उनको आर्थिक सहायता देकर कृषि के नवीन यंत्रों को खरीदवा दिया। किसानों ने नवीन कृषि यंत्रों को खरीदकर उनका प्रयोग कृषि में किया। इसका अच्छा परिणाम निकला और पैदावार पहले युगों के मुकाबले अधिक बढ़ गई।
  3. कृषि के प्रयोग में प्रयोग होने वाले पशुओं की नस्ल सुधारने हेतु गुप्त सम्राटों ने बड़े अछूते कार्य किये। गुप्तकाल में पशुओं की अच्छी नस्ल की उन्नति के लिए बड़े लाभदायक तथा उपयोगी कार्य किये गये। पशुओं के सुधार हेतु अस्पताल खोले गये। उनकी खुराक पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही साथ उनसे कृषि के कार्य भी कराये गये। अतः इस परिवर्तन का यह परिणाम निकला कि प्रत्येक ग्राम के पास कृषि में प्रयोग होने वाले अच्छे पशु हो गये, वर्ष में इनसे प्रत्येक किसान न अपने खेतों की जुताई अच्छे ढंग से की अतः कृषि की उन्नति हुई।
  4. रोगी पशुओं के लिए अस्पताल खोले गये तथा उनमें दवाइयाँ अधिक मात्रा में रख दी गई तथा रोगी पशुओं को शीघ्र उनके रोगों से छुटकारा दिलाया गया। साथ ही साथ उनको अच्छे किस्म का दाना, घास भी खिलाया गया। इस परिवर्तन से रोगी पशुओं की मरने की संख्या कम हो गई। पशु की मृत्यु संख्या कम होने से किसानों की आर्थिक दशा बिगड़ने नहीं पाई, साथ ही कृषि की भी उन्नति हुई, पैदावार बढ़ गई जिससे किसानों की आर्थिक दशा पहले के मुकाबले में अधिक अच्छी हो गई। इससे राज्य की शक्ति भी बढ़ी, अत: गुप्त साम्राज्य की शक्ति दिन-प्रतिदिन अच्छी होती गई।
  1. गुप्तकाल के सम्राटों के शासनकालों में राजनैतिक एकता तथा सामाजिक एकता के क्षेत्रों में बहुमुखी विकास के कारण कृषि की उन्नति के लिए देश में अच्छा वातावरण पैदा हो गया जिसके कारण गुप्तकाल में कृषि की दशा प्रत्येक वर्ष अच्छी होती गई तथा गुप्त साम्राज्य बराबर उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता ही गया।
  2. गुप्त सम्राटों के शासनकाल में कृषि की उन्नति के लिए वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया गया । गुप्तकाल से पूर्व कृषि की उन्नति के लिए इस प्रकार की वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग नहीं किया गया था। अतः गुप्तकाल में कृषि की बड़ी उन्नति हुई।
  3. कृषि की फसल अनेक रोगों के कारण पैदावार अच्छे रूप में नहीं थी, हानिकारक कीटाणु तैयार फसलों को बड़ी हानि पहुंचाते थे। गुप्तकाल में फसलों के हानिकारक कीटाणुओं को मारने के लिए जो नवीन परिवर्तन किये गये उनका अच्छा परिणाम निकला । फसल को हानि पहुंचाने वाले कीड़ों को मारने के लिए दवाइयों का प्रयोग किया गया, जिसके प्रयोग से कीटाणुओं को मार डाला गया। अतः कृषि की गुप्तकाल में बड़ी तेजी से उन्नति हुई।
  4. गुप्त सम्राटों के शासनकाल में कुएं, तालाब, नहरों, झीलों का अधिक संख्या में निर्माण कराया गया। प्रत्येक किसान के खेतों में एक कुआं कच्चा या पक्के रूप में था और प्रत्येक किसान अपनी फसल की सिंचाई समय के अनुसार करता था। इससे भी कृषि की उन्नति हुई और अधिक पैदावार बढ़ी। कुएं पक्के रूप में बनाये गये, इस काल से पूर्व कच्चे किस्म से कुयें बनाये जाते थे जो बरसात के मौसम में खराब हो जाते थे। वर्षा का पानी उनको खराब कर दिया करता था। जिसके कारण सिंचाई करते समय अनेक प्रकार की कठिनाई का किसानों को सामना करना पड़ता था । गुप्त सम्राटों ने इस कमी को देखा तथा पक्के किस्म के कुएं अधिक संख्या में बनवाये, जिसके कारण गुप्तकाल के समय पैदावार बढ़ी।
  5. गुप्त सम्राटों ने ऐसे किसानों को जिनके पास अपनी भूमि नहीं थी उनको भूमि दी, पशु तथा कृषि यंत्रों को खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी। ऐसी भूमिहीन किसानों में बड़ी रुचि के साथ अच्छी फसलें पैदा की जिनके प्रयत्नों से कृषि पैदावार बढ़ी। भूमिहीन किसानों की आर्थिक दशा अच्छी होती गई तथा राज्य को कृषि के रूप ऐसे किसानों में अच्छी तादाद में अन्न प्राप्त हुआ जिसके कारण देश में खुशहाली हर तरफ दिखाई देने लगी।

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